
तपती धूप में ठंडी छाँव है माँ
भगवान का दूसरा रूप जन्मदात्री है माँ,
त्याग बलिदान ममता की मूरत
दुनिया की सबसे प्यारी सूरत।
भगवान हर जगह नहीं रह सकते
इसलिए उन्होंने बनाया माँ को,
माँ ने ही बोलना एवं चलना सिखाया
अच्छे बूरे में फर्क करना बताया।
माँ बच्चों का पालन पोषण है करती
बच्चे की प्रथम गुरु है होती,
दिन भर भूखी रहकर भी
बच्चों को भरपेट खिलाती।
माँ के जैसा इस संसार में कोई न दूजा
बच्चों के लिए करती रहती है वो पूजा,
खुश किस्मत है वे लोग जिन्होंने माँ को पाया है
माँ के बिना सब अधूरा है सारा जग सूना – सूना है ।
डॉ निहारिका कुमारी
मेरी माँ स्वर्गीय शांति देवी को समर्पित
