अपरिवर्तनीया

         वह अपरिवर्तनीया है 
            वह नहीं बदलती
         उसके ही अंश से बने,
फले फूले,चाहे जितने बदल जाएं
        पर वह अपरिवर्तनीया है
         उनके अजाने ही उनकी
       सलामती की दुआ मांगती रहती है                              
               डरती भी रहती है
           कहीं उसकी दुआओं के 
               इस दौर को उसके
       अपने पाले पोसे ही,अंधविश्वास या
             ना जाने क्या क्या की
                संज्ञा ना देने लगें
           चाहे जितनी आधुनिका हो
                  उच्च शिक्षिता हो
         या गरिमामय पद की स्वामिनी हो
                 मां तो बस मां ही है
    वह नहींबदलती,वहअपरिवर्तनीया है
             कोई फर्क नहीं पड़ता
         शिक्षिता हो, अशिक्षिता हो
       अधुनिका हो या संकुचित संस्कारों 
       में पालित हो,बस एक जगह
        आकर सब एक हो जाती हैं
        जैसे जगह जगह से निकली

नदियां,नाले ,झील और झरने,सब गंगा में
मिल कर एक हो जाते हैं
सब गंगा ही बन जाते हैं
वह बस मां है कोई भी स्त्री मां
बन कर बस मां ही होती है
कोई और विशेषण
उपमा या उपमान
इस एक शब्द के आगे
बहुत दीन और हीन है
वह तो बस मां है, वह अपरिवर्तनीया है

                        --  मंजुल श्रीवास्तव

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