
।। मां ।।
तेरी बदौलत मिली जिंदगी मुझे…
कितना कुछ किया तुने…
नन्हा, बचपन और जवानी में…
और…मेरी शादी तक…और बाद भी…
मेरी हर इच्छा पूरी की तूने…।।१।।
आज जिंदगी से जूझ रही है तू…
तुझ से ही तो सिखा मैं ने…
जिंदगी को हराना और जिंदा रहना…
कितना कुछ किया है तूने…
आज मेरी बारी है…
तेरी सेवा करना…
धन्यवाद देता हूं तुझे…
अवसर दिया मुझे…
तेरी सेवा करने का…
शायद तेरे इतना नहीं कर पा रहा हूं मैं…
बेटा हूं ना तेरा…
मां कैसे बनूं मैं…।।२।।
मेरी मातोश्री निर्मला नारायण उमर्जी को समर्पित।
अच्युत उमर्जी
