प्यारी माँ

परिवार को सम्हालती हैं माँ ,
दुःख सुख में सँवारती हैं माँ ,
लोरी गाके सुनाती हैं माँ ,
मेरे हर दर्द की दवा हैं माँ।
बिना किसी स्वार्थ के प्यार देती हैं माँ ,
उदास होती हूँ तो हँसा देती हैं माँ ,
जिंदगी को आसान कर देती हैं माँ ,
जब खुश होती हूं तो फूली नहीं समाती हैं माँ ,
रूठ जाती हूं तो मनाती हैं माँ।
ठोकर लग जाती है तो दवाई लगाती हैं माँ ,
जख्मों को भुलाकर मरहम लगा देती हैं माँ।
ममता की मूरत भी तुम ही हो माँ ,
उंगली पकड़कर चलना भी तुमने सिखलाया माँ ,
मेरे जीवन की सच्चाई भी तुम ही हो माँ ।
मेरी प्रेरणा भी तुम ही हो माँ।
मैं तुमको वंदन करती हूँ माँ।
तुम्हारे चरणों में शीश झुकाती माँ।
ओ मेरी प्यारी माँ ,
तुम हो जग से निराली माँ ।

डॉक्टर अनीता मेहता

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