
“माँ” केवल एक शब्द नहीं, बल्कि वह शक्ति है जिसने हमें पाल-पोषकर दुनिया के काबिल बनाया। आज मैं जो कुछ भी हूँ, अपने पैरों पर खड़ा हूँ, वह सब माँ की ही तपस्या का फल है। अक्सर कहा जाता है कि किसी की अहमियत उसके जाने के बाद समझ आती है, लेकिन माँ का एहसास उनके रहते हुए होना चाहिए। आज दुनिया में कई ऐसे लोग हैं जिनके सिर पर माँ का साया नहीं है, वे उनकी कमी को बखूबी समझते हैं।
विडंबना यह है कि आज के दौर में सोशल मीडिया पर हम अक्सर ऐसी हृदयविदारक तस्वीरें देखते हैं जहाँ बच्चे अपनी जननी को वृद्धाश्रम छोड़ आते हैं। वे यह भूल जाते हैं कि जिस माँ ने नौ महीने अपनी कोख में रखा और अपनी हर जरूरत मारकर हमारी हर जिद पूरी की, वह आज उनके सहारे की मोहताज है। यदि एक माँ अकेले दम पर अपने बच्चों की सारी जरूरतें पूरी कर सकती है, तो आज सक्षम होने के बाद हम उनके लिए इतना भी क्यों नहीं कर सकते?
सच्चाई तो यह है कि माँ ने हमारे लिए जो किया है, उसका कर्ज हम सात जन्मों में भी नहीं चुका सकते। इसलिए, यदि आपके पास माँ है, तो उनकी हर छोटी-बड़ी ख्वाहिश पूरी करने की कोशिश करें। उन्हें वह सम्मान और प्यार दें जिसकी वे हकदार हैं। याद रखें, जिस घर में माँ खुश होती है, उस घर में साक्षात ईश्वर का वास होता है। माँ की सेवा ही सबसे बड़ी इबादत है।
मुख्य सुधार (Proofreading Notes):
वर्तनी (Spelling): ‘जरूरियात’ को ‘जरूरतें’ और ‘बोहोत’ को ‘बहुत’ में बदला गया है ताकि भाषा अधिक शुद्ध लगे।
प्रवाह: वाक्यों को आपस में इस तरह जोड़ा गया है कि वे एक कहानी या लेख की तरह लगें।
प्रभाव: ‘कर्ज’ और ‘जननी’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल कर आपकी बात को और प्रभावशाली बनाया गया है।
दिशा शाह कोलकाता पश्चिम बंगाल
