माँ की महिमा

तुम ममता की मूरत हो माँ भगवान की सूरत हो माँ, मैने इन आँखों से जन्नत नही देखी है माँ,तेरी दुआ बस रहती है माँ,मुझसे दूर क्यूं चली गई हो माँ ।

दूर आंसमा‌ में छुप गई हो,माँ दूर मुझसे क्यो हो गई हो,माँ,सबकुछ है आप नही हो माँ बेरंग हुई ज़िंदगी सब खो गया है,माँ।

आपसे जुदाई ऐसे हो गई है,माँ हर पल
दर्द के सागर में हूं, माँ,एक टीस मुझे झकझोरती रहती है,माँ एक नजर देखने को बेताब हूं,माँ।

बेचैन मन हर वक़्त बेकरार है माँ आवाज कब से आपकी सुनी नहीं है, माँ,आप तक पहुंचना मुश्किल है,माँ आप मांग लो इजाजत खुदा से,माँ।

आ जाओ एक बार मिलने तो, माँ क्या मेरे जज्बात से अनजान हो,माँ,इतनी अजनबी क्यो हो गई हो, माँ दुरियां इतनी क्यों बना गई हो,माँ।

दूर आसमा में क्यो छुप गई हो,माँ दुनिया की सोच से परे हूं मै,माँ,खुद से भी अनजान हूं मै,माँ ना रिश्तों की समझ हैं, माँ।

ना गैरों की परख हैँ, माँ सबने रूख मोड़ लिया है,माँ,अब बहुत अकेली हो गाई हूँ,माँ मुझे भी अपने पास बुला लो,माँ।

अपनी गोद मे सर रखकर सुला दो,माँ मुझसे दूर क्यो हो गई हो माँ दूर आसमां ,में क्यो छुप गई हो,माँ,…!!

संगीता वर्मा
कानपुर उत्तर प्रदेश

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!