
शत शत नमन है मेरी माँ को,
जन्म दिया फिर पाला पोशा,
दुलरा दुलरा कर बड़ा किया,
शिक्षा दे जीवन बदल दिया।
पिता श्री का अनुशासन,
माता का प्यार – दुलार,
दादी माँ का आशीर्वाद,
पूर्वजों से मिले संस्कार।
भ्राता श्री का मार्ग दर्शन,
बहनों से मिला संरक्षण,
दादी माँ, माँ की ममता,
जीवन के बने आवरण।
अब भी तो स्वप्नों में माँ कभी
कभी सिर पर हाथ फेरती हो,
पिता श्री की झिड़कियों का
मुझे सहारा तुम बन जाती हो।
जन्म जन्म तक माँ ऐसे ही,
प्यार और आशीर्वाद मिले,
आदित्य जब भी जन्म मिले,
मेरी माँ बनकर आप मिलें।
डॉ कर्नल आदिशंकर मिश्र
