
माँ, जब तू थी, जीवन संगीत था,
तेरे सान्निध्य में हर क्षण विश्रांत था।
तेरी गोद में थी सृष्टि की सारी शांति,
तेरे स्नेह में हर पीड़ा का अवसान था।
तेरी हँसी मेरे आँगन की रौशनी थी,
तेरा स्पर्श हर दर्द की औषधि थी।
तू चलती थी साथ तो राहें सरल थीं,
अब तेरे बिना ये पगडंडियाँ वीरान हैं।
तेरी अनुपस्थिति एक अनकहा आघात है,
हृदय में गूँजता अब भी तेरा अंतिम संवाद है।
तू चली गई, पर तेरी यादें रह गईं,
जैसे मंदिर में दीपक की लौ बह गई।
तेरी महिमा आनंदमयी और अनुपम थी,
तेरी ममता हर रिश्ते की प्रथम प्रेरणा थी।
तेरे बिना यह जीवन निराधार है,
तेरा चला जाना मेरी आत्मा पर भार है।
तू ही थी मेरा संबल, तू ही था विश्वास,
अब हर ख़ुशी भी लगती है कुछ उदास।
श्रद्धा-सुमन तेरे चरणों में अर्पित करती हूँ,
तेरे संस्कारों से ही स्वयं को दृढ़ करती हूँ।
तू सबसे महान थी, तू सबसे महान है,
मेरे हृदय का हर धड़कता गान है।
तेरी बेटी तुझे नमन करती है आज,
तेरे आशीष से ही संवरेगा मेरा हर काज।
माता नाम = कमल सोनी
नाम=नीलम सोनी फॉर्म ब्यावर राजस्थान
