
रहि-रहि याद परे ले माई।
दउरि- दउरि के कोरा लेके ओतना के दुलराई।।
खिचड़ी में जब लाई बान्हे हमके देइ खियाई ।
होली में त नवका कपड़ा हमके दे सिलवाई ।।
पढ़त में उ कान उखारे, चेउआ खूब बनाई।
लकड़ी में उ चेउआ खोंसे हमके देइ धराई।।
रहि रहि याद परेले माई।
जिद्द करीं त खूब मनावे, डंटा देइ देखाई।
दिवाली में सबसे पहिले लड्डू दे चोरवाई।।
कई रंग के सुईटर बीन के हमके दे पहिराई।
कहीं केसे आपन किस्सा अउरी केतना गाईं।।
जबले रहीहें सुरुज- चनरमा सुन हमरो भाई।
तबले ए दुनिया में हरपल अमर रही मोर माई।।
रहि- रहि याद परेले माई।
राम मनोहर मिश्र”माहिर विचित्र”
विचित्रालय,भिंडा मिश्र
पो -भाटपार रानी
जि -देवरिया उ प्र
पिन -274702
