
माँ तो माँ है जो ऑंखों का नूर है मेरी माँ,
अपने बच्चों के लिए दुआ और दवा है माँ।
कॉंटे हों राह में तो ऑंचल बिछा देती है माँ
उन्हें अपने दामन में फिर छुपा लेती है माँ ।
दीपक की ज्योति मस्जिद की अजान हैमाँ,
ईश्वर की अनुपम रचना प्रेम दीवानी है माँ ।
खुद भूखी रहे पर बच्चों को खिलाती है माँ,
बच्चों ने पूछा तो खा लिया बताती है माँ ।
माँ की ममता अद्धत क्षमता, शिशु में रमता मन,
अति प्यार दिखाती मन बहलाती मेरी माँ।
पय पान कराती लाड़ लड़ाती ध्यान रखे वह,
वह प्रेम लुटाए मन सुख पाए सबसे अच्छी माँ।
माँ सबसे प्यारी जग से न्यारी है ईश्वर रचना,
संस्कार सिखाती योग्य बनाती वो है मेरी माँ।
निज पास बुलाए लोरी गाए संग सुलाए माँ
है जीवन दाता बनी विधाता हितकारी है माँ।
दिखती है लौकिक भाव अलौकिक सब माने
कहती मौखिक सब गुण योगिक प्यारी माँ।
डॉ उषा अग्रवाल जलकिरण
छतरपुर मध्यप्रदेश
