
माँ तेरे ऊपर लिखने के लिए
जैसे ही कलम उठाया
माँ का पर्याय समझ आया
जो कोई समझ न पाया
माँ तेरा प्यार ही जीवन में पाया ,
माँ तेरे आँचल में
शुकुन पाया,
जो कोई समझ न पाया,
माँ तूने मुझे चलना, हँसना सिखाया
माँ तूने ही जिंदगी जीना सिखाया ,
जो कोई समझ न पाया
माँ मैंने महसूस किया कैसे तूने
अनेक उलझनों को सुलझाया ,
अंधियारे को हटाकर
ज्ञान का उजाला फहराया,
जो कोई समझ न पाया
हाँ माँ ऐसी ही होती है
“माँ मेरी दौलत है और
माँ ही मेरी शान है
उसके कदमों में ही तो
मेरा सारा जहाँ है “
सुषमा बग्गा
रायपुर छत्तीसगढ़
