माँ का प्यार निराला है!

बड़ी अनोखी माँ की ममता, माँ का प्यार निराला है।
जादू है माँ के हाथों में, यह स्वादों का प्याला है।।

एक भरोसा माँ धरती सी, सदा सँभाले रखती है।
आँखों की भाषा पढ़ लेती, बातें सभी समझती है।
हरे तिमिर अपनी आभा से, माँ ऐसा उजियाला है।।01

सुबह-सवेरे उठती जल्दी, रात गये ही सोती है।
माँ संस्कारों के बीजों को, जीवन भर ही बोती है।
कभी नहीं माँ बूढ़ी होती, माँ ऐसी सुरबाला है।।02

माँ रक्षक, माँ नर्स सरीखी, माँ निर्देशन करती है।
खुद भूखी रहकर के भी वह, उदर सभी का भरती है।
सबको ‘ममताशास्त्र’ पढ़ाती, माँ ममता की शाला है।।03

  • कैप्टन जगदीश चन्द्र पाण्डेय ‘जगदीश’
    नैनीताल (उत्तराखंड)

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