
तुम हो मेरी प्यारी माँ
तुम्ही से है मेरा सारा जहाँ
किए होंगे जरूर कुछ पुण्य मैंने
जो मैने तुमको माँ के रूप में पाया है
मालूम है मुझे ,
तुम्हें प्यारी है बस !खुशियाँ हमारी
बाकी सब कुछ तुम्हारे लिए पराया है
खुद गले में सोकर तुमने
सूखे में हमें सुलाया है
हर बुरी आफत को तुमने
अपने दृढ़संकल्प से उसे दूर भगाया है
किए होंगे ज़रूर कुछ पुण्य मैंने
जो मैंने तुमको माँ के रूप में पाया है
मुझे मालूम है
है तुम्हारे आँचल में
हमारे लिए ,बेशुमार प्यार ही प्यार
हमारे सुखद भविष्य के लिए
कर सकती हो किसी से भी तकरार
माँ करती हूँ मैं तुम्हारा हार्दिक आभार
तुमने मेरा डर भगा कर
आत्मविश्वास मुझ में जगाया है
मेरी सभी कमियाँ दूर करके
जीने के काबिल बनाया है
किए होंगे ज़रूर कुछ पुण्य मैंने
जो मैंने तुमको माँ के रूप में पाया है
प्रज्ञा जैमिनी’स्वर्णिमा,दिल्ली
अपनी जन्मदात्री माँ स्वर्गीय शकुंतला देवी जी को समर्पित।-प्रज्ञा जैमिनी’स्वर्णिमा,दिल्ली
