
माँ ..जन्म के प्रथम स्पर्श से जीवन के अनंत तक के सफर की सच्ची साथी माँ ।मातु श्री को मातृत्व दिवस की खूब खूब शुभकामनाएँ ।
अनछुए अनकहे प्रेम से परिपूर्ण सहजता की एक अनमोल छवि ईश्वर से परे ईश्वर ने जिस एक स्त्री को मातृत्व भाव दिया उसका नाम हे माँ ।माँ को किसी एक दिन में नहीं समेटा जा सकता है,क्योंकि उसकी ममता से हर एक दिन विशेष बन जाता है ।”माँ मात्र एक शब्द नहीं एक एहसास हे “माँ” के “आँ “में छुपा हे अम्बर जैसा आँचल जो सुखद ठंडी हवा देने वाला हे,जिसका प्रेम रूपी आँचल उजला वे रुपहला है ।माँ के ममत्व मे ईश्वरीयतत्त्व और दिव्यता का साक्षात संरक्षण सम्मलित होता है ।ईश्वर ने एक स्त्री को शायद माँ इसलिए भी बनाया क्योंकि “मैं ईश्वर हूँ-मेरी अनुभूति केवल भावों से होती है और मैं सर्वत्र अनेक रूपों में विद्यमान हूँ “
परंतु माँ अपने बच्चो के लिए जीवन के हर मोड़ पर एक सी ममता के साथ उपस्थित होती है ।
सत्यता यह है कि बच्चे के गर्भ में आते ही माँ अपना सम्पूर्ण जीवन,अपने जीने का उद्देश्य केवल और केवल बच्चे की उन्नति और उसको जीवन जीने की कला सिखाने में लगा देती है ।अपने जीवन का केंद्र बिंदु उसकी परवरिश और अपना भविष्य बना लेती है।अनंत सूर्य की किरणों की जैसे जिसका मातृत्व भाव है अपनी हर संतान के लिए ।ऐसी माँ का प्रेम और उनका समर्पण कलम और शब्दों मे व्यक्त करना सम्भवतः अकल्पनीय है । माँ को मेरा प्रणाम आपके लिए हर दिन “मातृत्व दिवस “है ।
मेरी मातु श्री—वीना मित्तल
मेरा नाम -प्रियंका अग्रवाल
