

वंदन है अभिनंदन है
मेरी दोनों मांओं का
पहला जिन्होंने मुझे जन्म दिया
दूजा जिन्होंने मेरे लिए जन्म दिया
रखकर सीने पर पत्थर ,
डाल दिया मेरी झोली में
बांट लिया है मुझसे ,
अपने जिगर के टुकड़ा को
दे दी मुझे घर बार
अपना सुनहरा संसार
दंडवत प्रणाम
उस परम पूजनीय मां को
जीवन मेरा खुशहाल हुआ है
उनके राज दुलारे से
मिल गया दोनों जहां
बस एक उनके आशीर्वाद से
पहली मां तो मां हैं ,
दूसरी मां बनी सबसे महान
दिया मुझे सौभाग्य वरदान ,
श्रेष्ठ पति और नेक संतान ।
अपनी प्यारी सासू मां श्रीमती शीला सहाय को समर्पित है मेरी यह रचना ।
स्वरचित
लिटरेरी जनरल सरिता कुमार , Saritakumar 954
