माँ ठंडी छाया

माँ वो ठंडी छाया है,
जो जेठ की तपती धूप में भी सुकून दे जाती है।
थके हुए कदमों की हर थकान
अपने आँचल में चुपके से समेट लेती है।

उसकी ममता निस्वार्थ होती है,
हर दर्द में बस उसकी ही सूरत दिखती है।
वो रातों को जागकर हमारे सपने सँवारती है,
खुद भूखी रहकर भी हमें खाना खिलाती है।

उसकी दुआओँ में ऐसी शक्ति होती है,
कि हर मुश्किल आसान लगने लगती है।
“माँ” केवल एक शब्द नहीं,
हर बच्चे का पूरा संसार होती है।

उसके बिना जीवन
सूने त्योहार-सा लगता है।
दुनिया में यदि कहीं सच्चा प्रेम बसता है,
तो वह माँ के हृदय में ही मिलता है।

माँ का प्यार ईश्वर का दिया
सबसे अनमोल वरदान है,
और हर बच्चे के लिए
यही सबसे बड़ा उपहार है। 💛

— नीलम वंदना
भोपाल, मध्य प्रदेश

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