
माँ मेरी तो सबसे प्यारी,
पूरे विश्व में सबसे न्यारी।
तेरे एहसास से ही माँ,
महकती है दुनिया सारी।
तेरी ममता की छांव में,
हर दुख छोटा लग जाता है,
तेरी एक मुस्कान से ही
घर स्वर्ग सा बन जाता है।
जब भी जीवन थक जाता है,
तेरा आंचल याद आता है,
तेरी दुआओं का असर माँ,
हर मुश्किल आसान बनाता है।
तू खुद दर्द छुपा लेती है,
पर हमको हँसना सिखाती है,
अपने सपनों को खोकर भी
हमारी दुनिया सजाती है।
तेरे बिना सूना हर आंगन,
तेरे बिना अधूरी खुशी,
तेरे होने से ही माँ,
हर रिश्ते में आती हँसी।
तू गंगा जैसी पावन है,
तू मंदिर की आरती है,
तेरे चरणों में ही माँ,
मेरी पूरी दुनिया बसती है।
धूप हो चाहे गहरी छांव,
तू हर पल साथ निभाती है,
अपनी ममता के आँचल में
हर तूफां से बचाती है।
माँ तू ईश्वर का रूप है,
तू जीवन का सम्मान है,
तेरे कदमों की धूल ही
मेरे लिए वरदान है।
माँ मेरी तो सबसे प्यारी,
पूरे विश्व में सबसे न्यारी,
तेरे एहसास से ही है
यह दुनिया सुंदर सारी।
संध्या त्रिपाठी
क्षेत्रीय मीडिया प्रभारी, महिला मोर्चा, भारतीय जनता पार्टी, गोरखपुर क्षेत्र
कम्पेयर, आकाशवाणी गोरखपुर
सदस्य, पूर्वोत्तर रेलवे स्टेशन सलाहकार समिति, गोरखपुर
प्रदेश अध्यक्ष, नमामि गंगे, उत्तर प्रदेश
राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, परवाह वेलफेयर सोसाइटी
