मां की सेवा

मां की सेवा करने से मिलता सदा जन्नत,
मां सदा खुश रहे प्रभु से करूं मैं मन्नत।
मां के आंचल में बसती वात्सल्य की प्रीत,
मां अपने बच्चों को सुनाए गाकर लोरी गीत।

भाव विभोर हृदय में समागम की आंचल,
मां के आश्रय में जीवन बन जाए उज्वल।
ममतामयी मैया का हृदय बड़ा ही कोमल,
प्रेम पवित्रता निस्वार्थ से मां रूप निर्मल।

ममतामयी मां में बहती करुणा की धार,
मां का नाम बड़ा है जग में नहीं भरता गागर।
सही ज्ञान की प्राप्ति से जीवन हुई उजागर,
मां की कृपा आशीष से जीवन होता उद्धार।

इतिहास के पन्नों में उत्कीर्ण है मां का नाम,
मां के चरणों में बसता सदैव स्वर्ग का धाम।
संस्कार शिक्षा नैतिक ज्ञान की देती पैगाम,
मां का हाथ सर पे रहे,हासिल करे मुकाम।

मां की सेवा करने से तृप्त होती जीवन,
जग में श्रेष्ठ इंसान बना सुनके मां का वाचन।
निस्वार्थ भाव से अपना पूरा जीवन करे कुर्बान,
प्रभु जैसी मूरत रूप को मेरा शत् शत् नमन।

नरेश कुमार दुबे

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