मां ईश्वर का स्वरुप

मां धरती पर ईश्वर का
पहला स्वरूप होती हैं,

मां अपने बच्चों के लिए एक
अभेद रक्षा कवच होती है,

जिन बच्चों के सिर पर मां का
हाथ होता है काल भी उन बच्चों
का कुछ बिगाड़ नहीं पता है,

जो निस्वार्थ बच्चों का केवल
हित चाहती है वह मां होती है,

जो अपने बच्चों के लिए कुछ भी
कर गुजरने का साहस रखती है
वह मां होती हैं,

जो बिना खाएं बच्चों का पेट भर
दे वह मां होती है,

जो चिलचिलाती धूप में अपने
साड़ी का आंचल बच्चे के सिर
पर रख दे वह मां होती है,

रात कितनी ही क्यों ना हो जाए
जब तक बच्चे घर ना आ जाए..

जो चैन से सो नहीं पाती है वह
मां होती है,

जब तक मां है मां की कद्र
किया करो….

वरना जिस दिन नहीं होगी मां..
आएगी क़ीमत समझ में उसे दिन,

जब तक मां है मां की कद्र
किया करो….

सच है मां धरती पर ईश्वर का
पहला स्वरूप होती है।

  • नीतीश सिंह
    कोलकाता,प.बं,भारत

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