
मेरी मातुश्री रमा मिनोचा को समर्पित
मां बोलना एक मीठी जुबान
बच्चा बन मन से पूछो
मुहँ से पहले निकला मां
मां के हाव-भाव आकर्षक
कभी एकटक देखतेजाए
वैसे मां स्नेह बरसाती जाए
कब मेरा बड़ा होगा लाल?
तरह- तरह के सपने सजाए
ह्रदय की धड़कन है मां
बच्चा गोद में, फूला न समाए
जब नींद न आती, लोरी सुनाती
शिक्षा देकर संस्कारी बनाती
बच्चे की प्रथम गुरू है मां
जब बच्चे को, कोई भय सताता
कहती – “मै हूँ न तुम्हारे साथ”
सदा आशीर्वाद देती है मां
बनती पालनहार,रक्षक, ढाल
मै तुझ पे बलिहारी जाऊँ, माँ!
तेरा एहसान नहीं उतार सकता मां
सुनील मिनोचा
