मातृत्व की चादर

मातृत्व की चादर ओढ़े हुए हूँ,
आज नया आईना लेकर खड़ी हूँ।
जिसमें झलकता माँ का महान रूप,
हर नारी में बसता उसका स्वरूप।
माँ के चरणों में स्वर्ग समाया,
उसने प्रेम का दीप जलाया।
ममता की हर कसौटी पर,
वह हर बार खरी उतरती है।
गोद में वात्सल्य का अमृत भरती,
हर पीड़ा को हँसकर सहती।
अपने दुखों को छुपा लेती है,
बच्चों को खुशियाँ दे देती है।
जीवन की राह सरल बनाती,
हर रिश्ते को प्रेम सिखाती।
सर्दी-गर्मी सब सह जाती,
माँ हर हाल में मुस्कुराती।
उसका आँचल सुख का सागर,
जिससे महक उठे हर घर।
माँ केवल जीवन नहीं देती,
वह जीवन जीना भी सिखाती।
— प्रेरणा तलवार

मेरी मातुश्री रेनु चौधरी को समर्पित

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