
मेरी मातुश्री आदरणीया शांति प्रसाद को समर्पित
भोली – भाली, प्यारी – प्यारी
मेरी माँ है सबसे न्यारी,
हँसी – ठिठोली कर करके
करती घर गुलज़ार हमारी I
नित नए – नए खेल सिखाती,
तरह -तरह से मन बहलाती
रूठ जाऊँ जो कभी अगर मैं
गीतों की है तान सुनाती I
ममता की साकार है मूरत,
मुस्काते हम, देख उसकी सूरत
मचले हम जब किसी बात पर,
कर देती इच्छा पूरी तुरंत I
पहला स्पर्श तेरा ही पाया है,
ये जीवन तेरा ही साया है
रहे प्रार्थना यही ईश्वर से,
हर जगह दिखे, तेरी ही छाया है I
सोचती हूँ कभी,
एक बार वो बचपन लौट आए,
माँ के आँगन की फुलवारी बन जाए,
जी लूँ दोबारा जीवन फ़िर से,
माँ का साथ, जिंदगी की दुआ बन जाए l
श्वेता प्रसाद ( शिक्षिका )
डी ए वी, कुकटपल्ली
हैदराबाद
