मातृ दिवस

मां को खो देता जो बचपन,
कैसे जीवित रहता होगा?
नवांकुर पादप के सदृश,
क्योंकर सिंचित होता होगा ?

किसे सुना कर हाले दिल,
निश्चिंत रहा करता होगा ?
किसके कांधे पर रख कर सिर,
सुख-दुख अपना कहता होगा?

छुप किस अंचल की छाया में ,
शावक सा बन, छिपता होगा?
अपने जीवन की ढाल बिना,
हर तूफां से लड़ता होगा ?

अपने जीवन की अर्ध -शति में,
ममता मयी मां को खोया था।
धैर्यवान बनते बनते भी,
मन बालक जैसा रोया था।।

   श्रीमती विनोद शर्मा
     रानीबाग, धामपुर 
      जिला-बिजनौर

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!