
जीवन की हर सफलता और संघर्ष के पीछे एक ऐसी शक्ति होती है, जो बिना कुछ कहे सब कुछ सँवार देती है। मेरे लिए वह शक्ति तुम हो माँ। समाज में हम चाहे कितनी भी बड़ी पहचान बना लें, कितने भी रिकॉर्ड स्थापित कर लें या किसी भी ऊंचे पद पर आसीन हो जाएँ, लेकिन तुम्हारी ममता के आँचल में पहुँचते ही हम फिर से वही छोटे बच्चे बन जाते हैं।
एक लेखक के रूप में जब मेरी कलम कागज़ पर चलती है, तो उन शब्दों की गहराई तुम्हारे दिए हुए संस्कारों से ही आती है। तुमने केवल पाल-पोसकर बड़ा नहीं किया, बल्कि विपरीत परिस्थितियों में भी अडिग रहना सिखाया। आज मैं समाज के लिए जो भी कार्य कर पा रही हूँ, वह तुम्हारे धैर्य और निस्वार्थ प्रेम की ही छाया है। तुम वह नींव हो, जिस पर मेरे सपनों का पूरा महल खड़ा है।
अक्सर दूसरों का ख्याल रखते-रखते तुम खुद को भूल जाती हो। सबको समय पर खाना खिलाना, सबकी सेहत का ध्यान रखना—इन सबके बीच तुम अपनी थकान छुपा लेती हो। माँ, अब जब मैं बड़ी हो गई हूँ, तो बस यही चाहती हूँ कि तुम थोड़ा वक्त अपने लिए भी निकालो। तुम्हारा स्वस्थ और मुस्कुराते रहना ही मेरी असली ताकत है।
मां,
ईश्वर का वरदान हो तुम, जीवन का सम्मान हो तुम,
मेरे हर शब्द की शक्ति और मेरी पहचान हो तुम।
शिखर छुए मैंने कई, पर ज़मीन से जोड़े रखा,
हर मुश्किल मोड़ पर तुमने मेरा हाथ थामे रखा।
सबका ख्याल रखा तुमने, अब अपनी बारी है,
तुम्हारी सेहत और मुस्कान ही, दुनिया में सबसे प्यारी है।
लिखूँ जो तुम्हारे लिए, तो शब्द कम पड़ जाते हैं,
माँ के आगे तो सारे रिकॉर्ड और कीर्तिमान झुक जाते हैं।
अस्तित्व मेरा तुमसे है, तुमसे ही मेरा हर सवेरा है,
तुम्हारी दुआओं के उजाले ने, हर मुश्किल को घेरा है।
माँ तुम प्रेम और अनुशासन का एक ऐसा अनूठा संगम हो, जिसने मुझे हर कदम पर सही मार्ग दिखाया। इस मदर्स डे पर मैं केवल यही कहना चाहती हूँ कि मेरी हर एक जीत, मेरा हर एक सम्मान और मेरा पूरा जीवन तुम्हारे चरणों में समर्पित है। माँ, तुम बस अपना ख्याल रखा करो, क्योंकि तुम्हारी खुशी और तुम्हारा स्वास्थ्य रहना ही मेरा सबसे बड़ा पुरस्कार है।
मां तुम्हारा कोई दिन नहीं हैं, तुमसे ही मेरा हर दिन हैं।
डॉ. मेघा रानी
रांची, झारखंड
