मेरी माँ

मेरी माँ बहुत ही प्यारी,
उनसे ही दुनिया मेरी सारी।
माँ के बिना जीवन अधूरा,
वो ही सागर, मैं छोटा सा धूरा।

चलना सिखाया, बोलना सिखाया,
अच्छा-बुरा सब समझाया।
कैसे जीना, कैसे मुस्कुराना,
दूसरों से प्रेम से पेश आना।

माँ कहती — “मन को दृढ़ बनाओ,
हर अँधेरे में दीप जलाओ।”
जब राह में कठिनाई आए,
तो पर्वत-सा अडिग हो जाओ।

माँ की नज़रों में है उजियारा,
वो ही मेरी राह का सितारा।
जब जीवन में दुख की छाया छाए,
माँ की दुआएँ ढाल बन जाएँ।

माँ के बिना घर नहीं घर होता,
वो ही तो उसका सच्चा स्वर होता।
चाँद-सी ममता, सूरज-सी रोशनी,
माँ से ही जग में हर कोमलता बसी।

धरती-आकाश का हर रंग,
माँ के प्रेम से है चहकता संग।
उनकी कृपा से ही दिखता संसार,
उनके चरणों में सारा प्यार।

हर पल मैं माँ को प्रणाम करूँ,
हर श्वास में उनका नाम भरूँ।
समय बदलता, घड़ी घूमती,
पर माँ की मूरत मन में झूमती।

माँ ही मेरा ईश्वर, मेरा बल,
उनके बिना सब शून्य, सब विफल।
हर संकट में जो देती थाम,
वो ही मेरी पूजा, मेरी प्यारी माॅ।

नित्यकला एस नायर

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