
श्रीहरि कहे सबसे अनमोल रिश्ता है मां।
दुनिया का सबसे उत्तम रिश्ता है मां।। ( 1 )
जन्म बाद संतान मुख पहला शब्द मां।
बच्चों की प्रथम शिक्षिका है मां।। ( 2 )
प्रेम, ममता,सहनशीलता की मूर्ति है मां।
करुणा,दया व भावुकता की मूरत है मां।। ( 3 )
मां,बेटी,बहन, भार्या चतुर्थ रूप है मां।
श्रीहरि कहे सबसे अनमोल रिश्ता मां।। ( 4 )
बेटी रूप में पिता आलय खुशी का राज़ है मां।
बहन रूप में भाइयों की मंगल कामनाएं है मां।।( 5 )
भार्या रूप में पति की प्रेरणादायक है मां।
दाम्पत्य जीवन की सच्ची संगिनी है मां।।( 6 )
परिवार का स्नेह व सृजन है मां।
संतान की रखवाली ढाल मां।। ( 7 )
भगवान भी जिस गोद को तरसे वो रिश्ता है मां।
श्रीहरि कहे सबसे अनमोल रिश्ता है मां।। ( 8 )
संतान जिस ऋण से उऋण नहीं हो वो रिश्ता है मां।
हर दुःख दर्द और कष्ट से बचाएं वो दुआं है मां।। ( 9 )
( यह रचना मेरी माताश्री श्रीमती संतोष देवी को समर्पित है। )
देवराज शर्मा
