
मेरी माँ तो सबसे प्यारी
सबसे न्यारी है;
और सभी परिवार जनो
की वो प्यारी फुलवारी है
सबसे हिलमिल कर रहना;उसको आता है।
राग-द्वेष तो तनिक नही
उसे सुहाता है।।
सबके दिल पर राज करे
वो ऐसी महतारी है।
मेरी माँ तो सबसे प्यारी
सबसे न्यारी है ।।
(2)
बात बात पर यहां तुनकना; नही उसको
भाता है ।और किसी की
निन्दा करने सुनने से;
मन उसका घबराता है।।
नही कोई ऊंच-नीच है
उसके मन में।और न
ही कोई छल-कपट यहां
निर्मल मन वारी प्यारी
मेरी मां मतवारी है।
मेरी माँ तो सबसे प्यारी
सबसे न्यारी है।।
(3)
कभी कोई ऊंची और कर्कश वाणी;नही
उसे सुहाती है ।मधुर
वाणी और मीठी मुस्कान ही उसे
लुभाती है ।।
सबके संग में प्यार से
रहना;उसे अच्छा लगता है ।और मधुर व्यवहार सेही;उसका जीवन मे
नाता है ।।
सबके मन को भाने वाली’रतन’ माता
सबको प्यारी है ।
मेरी माँ तो सबसे प्यारी
सबसे न्यारी है ।।
स्व रचित मौलिक रचना
रतनलालशर्मा’रतन ‘
किशनगढ (अजमेर)
राजस्थान।
7014564969
